शेयर बेचकर आप जो Profit कमाते हैं, वहीं पर होता है आपका नुकसान! आखिर क्या है ये Loss Aversion, देखें शेयर बेचने के 3 solid नियम


 

90% लोग Stock को गलत समय पर बेचते हैं और बड़ा Profit बनाने से चूक जाते हैं। Loss Aversion और Investment Mistakes से कैसे बचें

   क्या आपके साथ भी ये वाला ‘खेल’ होता है?

जब किसी स्टॉक में थोड़ा सा मुनाफ़ा दिखाता है, तो दिल तेज़ी से धड़कने लगता है, फिर मन में एक ही बात बार - बार चलती है कि "इसे बेच दो, कहीं profit हाथ से ना निकल जाए!" और आप emotions में आ कर स्टॉक को बेच देते हैं।

वहीं, जब कोई शेयर नुकसान में जाता है, तो आप आँखें बंद करके उसे सालों तक पकड़े रहते हैं, ये सोच कर कि "जब तक स्टॉक लॉस में नहीं चला जाता , तब तक इसको नहीं बेचूंगा"।

अगर हाँ, तो ये आपके दिमाग का एक मनोवैज्ञानिक जाल है—जिसे Loss Aversion Bias कहते हैं। और यही बीमारी 90% investors को कंगाल बना देती है।

इस ब्लॉग में हम ने अच्छे से हर एक point cover किया है कि , ये डर आखिर आता कहां से है और शेयर बेचने के 3 solid नियम कौन से हैं।

Loss Aversion Bias: दिमाग का ये डर क्यों है खतरनाक है?

पूरा स्टॉक मार्केट इनवेस्टर की psychology पर काम करता है और मनोविज्ञान साफ कहता है, नुकसान का डर, मुनाफा कमाने की खुशी से दोगुना ज़्यादा ताकतवर होता है।

यही डर हमें तर्कहीन (Irrational) फैसले लेने पर मजबूर करता है। हम चाहते हैं कि हर कीमत पर नुकसान से बचें, भले ही हमें उस नुकसान को टालने के लिए बड़ा मुनाफ़ा गंवाना पड़े।

सोचिए कभी अगर बाज़ार में अचानक क्रैश आता है, तो अच्छे निवेशक शांत रहते हैं, लेकिन जो Loss Aversion का शिकार होगा, वो panic में आकर सस्ते में शेयर बेच देगा। यही डर आपको एक कमजोर निवेशक बना देता है, जिसे बाजार हमेशा अपने इशारों पर नचाता रहता है।

इस डर का सबसे खतरनाक रूप ' The Disposition Effect' कहलाता है, जो आपकी जेब को धीरे-धीरे खत्म कर देता है।

The Disposition Effect : क्यों नहीं बेच पाते नुकसान वाला स्टॉक ?

ये Effect निवेशकों से दो खतरनाक गलतियाँ करवाता है :- 

1] नुकसान को गले लगाना : हम नुकसान वाले स्टॉक को यह सोचकर नहीं बेचते कि: "शायद यह रिकवर हो जाए।" दरअसल, हम नुकसान को accept नहीं करना चाहते।

• नतीजा: आपका पैसा एक "Dead Stock" में फंस जाता है, जबकि आप उसी पैसे को किसी बेहतर, ग्रोथ वाले शेयर में लगाकर अच्छा रिटर्न कमा सकते थे।

ऐसे में आप केवल नुकसान नहीं झेल रहे, आप बड़ा मुनाफ़ा कमाने का मौका भी गंवा देते हैं।

2] मुनाफे से डरना - वहीं, जैसे ही मुनाफ़ा दिखता है, हम उसे जल्दी बेच देते हैं। हमें डर होता है कि हमारा प्रॉफिट कहीं हाथ से फिसल न जाए।

• नतीजा: आप छोटी मछली पकड़कर खुश होते हैं, जबकि अगर थोड़ा टिक जाते तो मछली बड़ी व्हेल बन सकती थी। यही आदत आपकी वेल्थ क्रिएशन को बुरी तरह रोक देती है।

क्या आप Loss Aversion के शिकार हैं?

देखिए नीचे कुछ सवाल दिए हैं, जिन्हें पढ़ कर आप को Yes और No में जवाब देना है, अगर 2 या उससे ज़्यादा सवालों का जवाब हाँ आता है, तो फिर समझ जाइए कि आप भी इमोशन में आकर ट्रेडिंग करते हैं।

1) क्या आप बाज़ार गिरने पर अपने पोर्टफोलियो को देखने से डरते हैं?

2) क्या आप उस स्टॉक को बेचना टालते रहते हैं, चाहे जिसमें आपको भारी नुकसान हो रहा है?

3) क्या आपने पिछले 6 महीनों में कोई ऐसा शेयर जल्दी बेच दिया जिसने बाद में आपके बेचने के रेट से कहीं ज्यादा रिटर्न दिया हो।

4) क्या आप अपने दोस्तों को अपने पोर्टफोलियो के केवल उन शेयरों के बारे में बताते हैं जो बढ़ रहे हैं?

अब अगर आप को पता लग गया कि आप को भी Loss aversion की दिक्कत है, तो चिंता मत कीजिए, इसको पछाड़ने के नियम भी हम ने दिए हुए हैं, जो कि खुद मैने और मेरे जानने वाले निवेशकों ने आजमाए हुए हैं।

डर को हराने के 3 नियम: शेयर को सही समय पर कैसे बेचें ?

देखिए अपना स्टॉक बेचने का सही समय वो नहीं है जब स्टॉक महंगा हो जाए, बल्कि वह है जब आपका प्लान कहे कि अब बेचना चाहिए।

और उस प्लान के ये नियम हैं - 

• नियम 1 : Stop-Loss को अपना दोस्त बनाओ

Loss Aversion का सबसे बड़ा हथियार उम्मीद है। डर खत्म करने के लिए Stop-Loss का इस्तेमाल करें। यह तय करता है कि आप कितना नुकसान सह सकते हैं। अब कुछ लोग यहां भी एक बड़ी गलती करते हैं कि Stop-loss बहुत बड़ा लगा देते हैं, और फिर रोने लगते हैं कि नुकसान हो गया, देखिए स्टॉप - लॉस उतना ही लगाएं जितना आप सह सके, यानि कुछ पैसा चला भी जाए तो आपको ज्यादा दुख न हो।

• BONUS Tip: अपने मन में नहीं, अपने ब्रोकर app पर ही स्टॉप-लॉस सेट करें। यही वो discipline है , जो स्टॉक मार्केट में सफल बनाता है, लोगों की बातों ज्यादा न सुने, अगर आप कायदे से ट्रेडिंग करोगे तो ही आप profitable इनवेस्टर बन सकते हो।

• नियम 2: double अकाउंट = कम डर

दो अलग अकाउंट खोल लें और अपने लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो को ट्रेडिंग अकाउंट से अलग रखें। जब दोनों का पैसा एक ही जगह होता है, तो हर छोटे-मोटे नुकसान से डर लगता है। और फिर आपका मन आपको उल्टे सीधे decision लेने के लिए मजबूर कर देता है।

यहां पर हम ने कुछ अच्छे ट्रेडिंग apps के लिंक दिए हुए हैं, जिन्हें मै खुद इस्तेमाल करता हूं, आप चाहे तो आप भी इनमें अकाउंट बना कर उनको use कर सकते हो।

Dhan - https://join.dhan.co/?invite=QWMTT05170

UpStox - https://upstox.onelink.me/0H1s/6NABGE

Zerodha Kite- https://zerodha.com/?c=IHH140&s=CONSOLE

Groww - https://app.groww.in/v3cO/bbeqpcme

नियम 3: The Psychology of Money

इमोशंस को हटाओ और प्लान को लिखो , Loss Aversion का सबसे बड़ा समाधान है याददाश्त। जब आप कोई शेयर खरीदते हैं, उसी दिन एक डायरी या नोट ऐप पर लिखिए कि आप इसे कब और किन शर्तों पर बेचेंगे (example - जब प्रॉफ़िट 30% होगा, या कंपनी का CEO बदलेगा)। ये ट्रिक छोटी जरूर लग सकती है लेकिन बहुत फायदे की है। जब बेचने का समय आए, तो इमोशन नहीं, केवल प्लान पढ़िए। 

निष्कर्ष

Loss Aversion एक मानसिक जाल है, और आप कुछ नियम के साथ चले तो इस से आसानी से बच सकते हैं।

अब आप ये चीज़ जान चुके हो कि शेयर कब बेचना चाहिए, मतलब "जब आपका प्लान कहे, न कि जब आपका डर कहे"।

Loss Aversion पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

शेयर को कब तक होल्ड करना चाहिए?
शेयर को समय के हिसाब से नहीं, बल्कि प्लान के हिसाब से होल्ड करना चाहिए। स्टॉक बेचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप खरीदने से पहले तय करें कि आप किस लक्ष्य (eg. 30% मुनाफ़ा) या किस शर्त (eg. कंपनी का मैनेजमेंट बदलने पर) पर बेचेंगे। एक अच्छे शेयर को तब तक होल्ड करें जब तक कंपनी के फंडामेंटल सही हैं, न कि तब तक जब तक आपका डर खत्म न हो जाए।
मुनाफ़ा कमाने के लिए शेयर कब बेचें?
मुनाफ़ा कमाने के लिए शेयर तब बेचें, जब: (1) वह आपके निर्धारित लक्ष्य (Target Price) पर पहुँच जाए, या (2) आपको अपने पैसे को कहीं बेहतर निवेश में लगाने का मौका मिल रहा हो (जिसे Opportunity Cost कहते हैं)। Emotion में आकर थोड़ा सा मुनाफ़ा देखकर बेचना आपकी वेल्थ क्रिएशन को रोकता है।
टैक्स से बचने के लिए शेयर कितने समय तक होल्ड करें?
आपको शेयर को कम से कम 12 महीने (एक साल) तक होल्ड करना चाहिए। अगर आप एक साल बाद बेचते हैं, तो वह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) कहलाता है। LTCG में ₹1 लाख तक का मुनाफ़ा टैक्स-फ्री होता है, और ₹1 लाख से ऊपर सिर्फ़ 10% टैक्स लगता है। अगर आप 12 महीने से पहले बेचते हैं, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) के तहत आपको अपने स्लैब रेट (15% से 30%) के हिसाब से ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है।
शेयर कब खरीदे और कब बेचे जाते हैं?
यह सवाल निवेश का सबसे बड़ा जाल है! कोई भी इंसान या AI भी आपको निश्चित समय नहीं बता सकता। Loss Aversion और Fear of Missing Out (FOMO) से बचने के लिए, शेयर तब खरीदें जब वह आपके रिसर्च के अनुसार सही दाम पर हो, और तब बेचें जब वह आपके Exit Plan के अनुसार सही शर्त पूरी कर दे। timing की चिंता छोड़ दें।
क्या शेयर मार्केट जुआ है?
बिल्कुल नहीं, अगर आप इसे रिसर्च और अनुशासन (Discipline) के साथ करते हैं। शेयर मार्केट तब जुआ बन जाता है जब आप Loss Aversion या Overconfidence जैसी भावनाओं में बहकर, बिना किसी प्लान के इमोशनल ट्रेडिंग करते हैं। अगर आप सही मनोविज्ञान और स्ट्रेटेजी से काम करते हैं, तो यह एक गंभीर व्यवसाय है।

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